देश में दलित नहीं सभी धर्म के लोग सवर्ण, शंकराचार्य

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हरिद्वार, [भड़ास फॉर इंडिया ]: ज्योतिष एवं द्वारिका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने देश में किसी को भी दलित मानने से इंकार किया है। कहा कि देश में कोई दलित नहीं है। सभी धर्म के लोग सवर्ण हैं और सभी जातियां एक समान हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिकरण के चलते लोगों को दलित बना दिया गया है। यहां तक कि उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को भी दलित नहीं मानने से इंकार किया। साथ ही लोगों से इन्हें दलित की श्रेणी में न रखने का आह्वान किया।

 

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कनखल के शंकराचार्य मठ पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में दलित की कोई परिभाषा नहीं है। यह राज्य व क्षेत्र के आधार पर बदल जाता है। एक राज्य में कोई सवर्ण जाति का होता है तो दूसरे राज्य में उसी जाति को ही दलित की संज्ञा दे दी जाती है।

उन्होंने कहा कि भारत में सर्व धर्म संभाव का समावेश है। इसलिए यहां जाति विशेष का मतभेद न किया जाए। लोक हित में कार्य किया जाए। लोक हित में क्या है हमें यह देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गंगा नदी का दर्शन करने हर जाति के लोग आते हैं। इसमें स्नान भी करते हैं पर कहीं किसी को रोका नहीं जाता है। दलित नाम की कोई जाति नहीं है।

शंकराचार्य ने सुनाई आजादी के आंदोलन की दास्तां

नेपाल में लाहोर जाति का उदाहरण देते हुए कहा कि नेपाल में इस जाति के लोगों को दलित की संज्ञा दी गई है, जबकि गुजरात में इसी जाति को सवर्ण जाति का मना जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों ने ही दलित को जाति बनायी। अंबेडकर महाराष्ट्र राज्य में महार है, जबकि सेवई जिले में महर जाति के लोग ही उनके साथ उठते बैठते हैं। यह राजनीति के चलते है। लोग नारेबाजी के चक्कर में जातियों में भेदभाव करते हैं।

साईं को नहीं मानूंगा ईश्वर

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सांई को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा। वह कभी ईश्वर नहीं हो सकते हैं। दुर्भवना के चलते शिरडी प्रशासन ने शिरडी में धारा 144 लागू किया। इसके बाद हमारे लोगों को धारा 144 के उल्लंघन का आरोपी बनाकर मुकदमा दर्ज किया। उसके बाद शिरडी न्यायालय की ओर से नोटिस भेजी गयी। उन्होंने कहा कि वह न्यायालय में नोटिस का जवाब देने नहीं जाएंगे। यदि न्यायालय गिरफ्तार कर जेल भी भेजता है तो भी सांईं को ईश्वर नहीं मानूंगा।

तिरुवल्लुवर की प्रतिमा लगाकर फैला रहे अशांति

तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा को हरिद्वार में स्थापित करने पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि तमिल कवि के इतिहास से परिचित कराया जाना चाहिए था। जब उनका उत्तराखंड से कोई संबंध नहीं था तो फिर क्यों उनकी प्रतिमा को स्थापित कर शांतिमय प्रदेश में अशांति फैलाने का का प्रयास किया जा रहा है।

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