आस्तीन के एनाकोंडा सत्ता की दीवारों का विभीषण

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देहरादून पहले उत्तराखंड को बेचा और अब खबरों की बोली लगाई जा रही है जी हां यह बात सही है देवभूमि उत्तराखंड में ऐसा ही कुछ हो रहा है पत्रकारिता के मानदंडों को नीलाम करने वाले कई ऐसे चेहरे हैं जिनके दामन पर दाग तो बहुत हैं लेकिन आज वह ईमानदारी से अपनी पत्रकारिता के झंडे सत्ता की दीवारों पर लहरा रहे हैं।

देवभूमि उत्तराखंड हमेशा से ही ऐसे विभीषण और शिखंडीओं के कारण बदनाम होती रही है इसके साथ ही बदनाम मीडिया बिरादरी भी हुई है क्योंकि उसका बदनाम होना चंद ऐसे लोगों ने किया है जिन का करतब मदारी से लेकर ऐसी कठपुतली की तरह रहा है जो हमेशा सत्ता के दरबारों में अपनी चमक धमक दिखाकर उनको अपने कब्जे में लेते रहे उत्तराखंड देवभूमि में लंबे समय से राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ खबरों को पैनी धार देने वाले कई ऐसे कमलवीर रहे है जिन के कारनामों पर अगर प्रकाश डालें तो उसमें इतने छेद नजर आएंगे कि उनको पत्रकारिता के मापदंडों का अता पता ही नहीं या यह कहें वह अपने राजनैतिक आकाओं के इशारों पर ऐसे कारनामों को अंजाम देते रहे।

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उत्तराखंड में वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार बिगुल बजाने वाले लोगों का ईमान बदलता हुआ नजर आ रहा है इसके पीछे के कारण कहानी बयां कर रहे हैं या तो कुछ लोगों की पूछ इनके हाथ लग गई है या फिर मसला कुछ और है लेकिन निश्चित रूप से ऐसे लोगों ने उत्तराखंड की मीडिया को जरूर बदनाम किया है खबर को खबर के रूप में परोसने का जो काम किया जाना चाहिए था उसके मानदंड अब सिर्फ लोगों की सलाह पर चलने लगे हैं किस खबर को क्या रूप देना है इसे लेकर अब खबरों को परोसा जाता है।

उत्तराखंड में ऐसी पत्रकारिता निश्चित रूप से आने वाले समय के लिए बेहद खतरनाक डगर में है या यह कहें कि ऐसे लोग आस्तीन में छुपे हुए वह एनाकोंडा है जो किसी को भी निगल जाने का दम रखते हैं लेकिन सच परेशान हो सकता है लेकिन प्रताड़ित नहीं,इसी तर्ज पर उत्तराखंड में ऐसे लोगो के खिलाफ क्या किया जाना जरुरी है इसको लेकर जवाब किसी के पास तो मौजूद होगा इसके आलावा ये भी बता दे भड़ास फॉर इंडिया अपनी हर खबर को अपनी माध्यम से परोस कर जनता का विश्वाश कायम किये जाने में कामयाब रहा है।

बरहाल खबर यही है उत्तराखंड में राज्य के मुखिया के खिलाफ जिस तरह से खबरों की लॉबिंग की जार रही थी उसके पीछे किसका हाथ था इसका सच अगर समय रहते सामने नहीं आया तो इस तरह की साजिश का शिकार आने वाले दिनों में किसी को बनाया जा सकता है राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर सरकार में बड़े पदों पर बैठे अधिकारी से लेकर हर वर्ग को आखिर इतना अधिकार तो है आखिर आस्तीन में छुपा हुआ वो एनाकोंडा वो कौन था जो अपना शिकार आसानी से निगल गया क्या ये समझ लिया जाये ये सच अब हमेशा के लिए एक ऐसे राज के साथ दफ़न हो गया है जिसका बहार निकल कर आना अब आसान नहीं।

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