देहरादून मीडिया ये दोस्त है धोखेबाज़ नहीं

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देहरादून। दिलो के मिलने और विचार का एक होना दोस्ती की परिभाषाः का अटूट बंधन कहलाता है यही वजह होती है जब दोस्ती को परिवार से भी अधिक वजन दिया जाता है ये एक ऐसा रिश्ता होता है जिसके सामने सभी रिश्ते फीके भी नज़र आते है दोस्ती का मतलब कभी भी धोखा देना नहीं होता बल्कि दोस्त के साथ हर सुख दुःख में खड़ा होना होता है।

दोस्ती की वैसे तो कई मिसाल क़याम है लेकिन आज हम आपको देहरादून की मीडिया के उन दोस्तों से रूबरू करवा रहे है जिनकी दोस्ती एक ऐसे कुनबे में जुड़ चुकी है जिसकी मिसाल देहरादून मीडिया में आपसी विवाद से कोसो दूर इन दोस्तों की एकता कई मायने में अलग नज़र आती है देहरादून मीडिया में काफी लम्बे समय से पत्रकारिता कर रहे चारो दोस्त आज देहरादून के लिए एक मिसाल और एकता का ध्वज वाहक के रूप में नज़र आते है।

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देहरादून मीडिया में न्यूज़ 24 के अधीर यादव,ईटीवी भारत के किरन कांत,न्यूज़ नेशन के विनोद कुमार,सूर्या समाचार के राजेश वर्मा जिनकी दोस्ती की मिसाल एक ऐसा उदाहरण बन गयी है जो असल में दोस्ती के मायने बय करती नज़र आती है देहरादून मीडिया में वैसे तो कई ग्रुप मौजूद है लेकिन उनकी दोस्ती सिर्फ पर्दे के पीछे से नज़र आती है लेकिन देहरादून मीडिया में इन दोनों मीडिया वालो की दोस्ती की मिसाल का कोई सानी है अगर हमारी मीडिया बिरादरी में सभी इसी तरह दोस्ती का हाथ पकड़ कर आगे आए तो देहरादून मीडिया का कुनबा आपसी होने वाले विवादों से भी किनारा करता नज़र आएगा।

मीडिया लाइन में वैसे इनकी दोस्ती काफी कम लोगो से होती है क्योकि मीडिया लाइन में भरोसा कायम किया जाना काफी मजबूत डोर के रूप में होता है जो आसानी से कायम नहीं किया जा सकता यही वजह है अधिकारी से लेकर नेता मीडिया के लोगो पर अधिक भरोसा कायम उसकी कलम कब खबर लिख दे सभी पर नहीं करते जिसके कारण मीडिया से कुछ लोग कीप डिस्टेंस के रूप में भी दूरी बना कर रहते है।

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