कोर्ट फैसले के बाद मायूस दिखे बागी विधायक

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कोर्ट फैसले के बाद मायूस दिखे बागी विधायक
देहरादून उत्तराखंड की विधानसभा कार्यवाही में भाग लेने का ख्वाब सजाए बैठे कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को सुप्रीमकोर्ट से बड़ी निराशा हाथ लगी है। बुधवार को सुप्रीमकोर्ट ने उन्हें कोई भी राहत नहीं दी। हालांकि कोर्ट ने स्पीकर को हटाने के उनके प्रस्ताव पर अयोग्यता से पहले फैसला न करने के मुद्दे पर मुख्य मामले के साथ विचार करने की हामी जरूर भर दी है। कोर्ट ने बागियों की अर्जी निपटाते हुए कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर कोर्ट मुख्य मामले के साथ विचार करेगा और सारा मसला सुप्रीमकोर्ट के अंतिम फैसले के आधीन होगा। कोर्ट ने मुख्य मामले पर सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तिथि तय कर दी है। बागियों के वकील सी. सुंदरम ने अदालत से अरुणाचल प्रदेश के ताजा फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्पीकर द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराने का आदेश गलत है क्योंकि अयोग्य ठहराये जाने से पहले ही उन लोगों ने स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव दिया था। स्पीकर ने उसका निपटारा करने से पहले ही अयोग्यता पर फैसला सुना दिया। जबकि सुप्रीमकोर्ट ने अरुणाचल मामले कहा था कि ऐसी स्थिति में पहले स्पीकर के खिलाफ आये प्रस्ताव को निपटाया जाना चाहिये। लेकिन कांग्रेस की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी और स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल व मुकेश गिरि ने मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव में कोई कारण नहीं बताए गये थे। कानून के मुताबिक स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सत्र शुरू होने से 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए था जो कि नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ये अयोग्य ठहराये जा चुके हैं और उसके बाद ये सभी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस सारे घटनाक्रम को देखते हुए इनकी याचिका महत्वहीन हो गयी है और खारिज करने लायक है।

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