कांग्रेस में मालती,नारायण पाल तो भाजपा में सौरभ,विकल में टिकट को लेकर ​सीधी जंग

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कांग्रेस में मालती,नारायण पाल तो भाजपा में सौरभ,विकल में टिकट को लेकर ​सीधी जंग

—आशीष पांडेय—
सितारगंज। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तिथि घोषित कर आचार संहिता लागू करने के बाद सियासत गरमाई हुई है। प्रत्याशी घोषित करने में बसपा और सपा ने कांग्रेस व भाजपा को काफी पीछे छोड़ दिया है। इधर, कांग्रेस में टिकट को लेकर जहां मालती विश्वास और नारायण पाल के बीच मुकाबला सिमट कर रह गया है तो वही सौरभ बहुगुणा व खूब सिंह ‘विकल’ में भाजपा के टिकट को सीधी जंग है।
चुनाव आयोग ने बीती चार जनवरी को उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित की थी। तभी से आचार संहिता भी लागू है। चुनाव लड़ विधायक बनने का सपना संजोएं नेता आज कल जनता के सेवक ही नहीं ​​बल्कि उनके दु:खों के पालनहार नजर आ रहे हैं। मतदाताओं को लुभावने के​ लिए नेता हर वो काम कर रहे हैं जो कि राजनैतिक सलाहकारों द्वारा उन्हें बताया जा रहा है। आम दिनों में देर तक सोने वाले इन नेताओं की दिनचर्या भी बदल गई है। तड़के सुबह उठना और लोगों के घरों में जाकर कुशलक्षेम पूछना और उनकी चाय पीना आदि दिनचर्या में शामिल हो गया है।
सितारगंज विधान सभा में बसपा ने काफी समय पहले ही पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नवतेज पाल सिंह को विधानसभा का संयोजक बनाकर उनका टिकट फाइनल कर दिया था। तब से वह लगातार जनता के बीच चुनाव प्रचार में जुटे हैं। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने भी एड. योगेंद्र कुमार यादव को अपना प्रत्याशी बना कर उन्हें भी चुनाव में उतार रखा है। इसके अलावा नगर पालिका सभासद अख्यितार अहमद पटौदी समेत करीब तीन अन्य लोग भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
जबकि कांग्रेस से जिला पंचायत सदस्य मालती विश्वास, पूर्व विधायक नारायण पाल, ग्राम प्रधान भवतोष आचार्य, दीपक विश्वास एवं कुमंवि के अध्यक्ष किरन मंडल आदि टिकट की दौड़ में शामिल हैं। पूर्व विधायक नारायण पाल अपने पूर्व के कार्यकाल और अपनी उंची पैठ को लेकर जहां टिकट में मजबूती बनाएं हुए हैं तो वही जिला पंचायत की दो बार सदस्य रही मालती विश्वास ने खुद को अपनी छवि और बंगाली वोटों के ध्रवीकरण के मुद्दे पर टिकट की सबसे सशक्त दावेदार सिद्ध कर रखा है। जिस कारण टिकट का संघर्ष अब मालती विश्वास और नारायण पाल के बीच सिमट कर रहा गया है।
यही हाल भाजपा का भी है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रहे खूब सिंह ‘विकल’, पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुर सिंह, किशोर राय, जिला पंचायत सदस्य तारक मंडल, भगवान पांडे आदि टिकट की लाइन में हैं। सौरभ बहुगुणा मुख्यमंत्री पुत्र होने के कारण तो वही खूब सिंह ‘विकल’ स्थानीय नेता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्टभूमि के होने कारण टिकट की कतार में आगे हैं। सौरभ बहुगुणा तो शुरू से ही अपना टिकट पक्का माने कर चल रहे हैं लेकिन इस बीच वरिष्ठ भाजपा नेता खूब सिंह ‘विकल’ की दावेदारी ने पेंच फंसा दिया है। सूत्रों का कहना है कि जो टिकट पहले एक तरफा फाइनल माना जा रहा था, अब उस पर कई एंगल से विचार हो रहा है। टिकट के इस सियासी खेल में कौन बाजी मरता है, यह तो भविष्य ही बताएगा किन्तु खूब सिंह ‘विकल’ जिस ढंग से एकाएक उभर कर ऊपर आएं हैं यह अचम्भित करने वाला जरूर है।

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