‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’’ के दूसरे चरण का शुभारम्भ

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‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’’ के दूसरे चरण का शुभारम्भ
देहरादून मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को न्यू कैन्ट रोड़ स्थित सीएम आवास में ‘‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’’ के द्वितीय चरण का शुभारम्भ किया। इस योजना के अन्तर्गत एपीएल एवं बीपीएल परिवारों को 1 लाख 75 हजार रू. तक का नकद रहित स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। योजना के अन्तर्गत 1206 सामान्य व 459 गम्भीर बीमारियों का उपचार किया जायेगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में 151 सरकारी व निजी अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, राज्य की तरफ से अपने उन सभी नागरिकों को दी गई अधिकारिता है जो गरीबी के कारण अपना व अपने परिजनों का उचित इलाज नहीं करा पाते हैं। ऐसे ही भाई बहनों के सपोर्ट में हमारी यह योजना है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने योजना के तहत चिन्हित प्रत्येक अस्पताल के साथ फेसिलिटेटर व प्रत्येक जिले में एमएसएमवाई माॅनिटर नियुक्त करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के दूसरे चरण में उपचार की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख 75 हजार रूपए किया गया है। परंतु इसका तात्पर्य यह नहीं है कि इससे अधिक के इलाज के लिए सहायता नहीं मिलेगी। इलाज का खर्च इस योजना की सीमा से अधिक होने पर राज्य व्याधि योजना से कवर किया जाएगा और उसके बाद मुख्यमंत्री राहत कोष से भी सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार अपने किसी नागरिक को इलाज के लिए धन के अभाव में विवश नहीं रहने देगी। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना नागरिकों, राज्य सरकार व निजी अस्पतालों सभी के लिए लाभप्रद है। राज्य सरकार हर साल इस पर बड़ी राशि व्यय करेगी। निजी अस्पतालों को इससे जुड़ने के लिए आगे आना चाहिए। इस योजना के कारण निजी अस्पताल पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी सुविधाएं बढ़ाएंगे। भविष्य में हम 1 लाख 75 हजार रूपए की सीमा को बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं। योजना की सफलता के लिए जरूरी है कि व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए। हमारी आशा बहनें हसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हमें उन पर पूरा भरोसा है। आशाएं इसे एक चुनौती की तरह से लें। हमने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि आशाओं को हर हाल में न्यूनतम 5 हजार रूपए प्रति माह अवश्य मिलें।

बी पी एल परिवारों को निःशुल्क उपचार की रकम पौने दो लाख 

ऐसा करने वाला  पहला राज्य होगा। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। राज्य में भरसक प्रयास के बाद भी देश के अन्य राज्यों के समान ही डाक्टरों का अभाव है। हमने लोक सेवा आयोग के माध्यम से चिकित्सकों की भर्ती की, वाॅक इन इंटरव्यू के आधार पर गेस्ट डाक्टरों की भर्ती की व्यवस्था की। दूसरे राज्यों की तुलना में उŸाराखण्ड में डाक्टरों के लिए अधिक बेहतर पैकेज है। दूरस्थ क्षेत्रों में सर्जिकल कैम्प आयोजित किए जा रहे हैं। हमारी योजना है कि सभी ब्लाॅकों में हर 25 दिनों में एक स्क्रीनिंग कैम्प का आयोजन किया जाए। इसमें सचल वाहनों में सभी जांच आदि की सुविधाएं होंगी। साथ ही विभिन्न विशेषज्ञ डाक्टर भी इसमें आएंगे। अधिक गम्भीर बीमारी होने पर बड़े अस्पतालों में भर्ती करवाया जाएगा। सचिव डा.भूपिंदर कौर औलख ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य के सभी एपीएल एवं बीपीएल परिवारों के लिए अप्रैल, 2015 में प्रारम्भ की गयी है। उन्हांेने कहा कि राज्य सरकार की यह महत्वकांक्षी योजना के द्वारा लगभग 11 लाख एपीएल एवं बीपीएल परिवारों को 50 हजार तक की सीमा में निःशुल्क उपचार दिये जाने की व्यवस्था थी, जिसे द्वितीय चरण में बढ़ाते हुए 1 लाख 75 हजार तक कर दिया गया है। इस योजना के अन्तर्गत उपचार हेतु 1206 सामान्य बीमारियों, 459 गम्भीर बीमारियों को चिन्हित किया गया है। इस योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है। कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना(आरएसबीवाई) के सभी कार्ड धारकों को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना(एमएसबीवाई) में आच्छादित किया जाएगा एवं उन्हें भी इस योजना का समान लाभ मिलेगा।

इस योजना के अन्तर्गत जो भी परिवार पूर्व के चरण में छूट गये है अथवा जिनके कार्ड में कोई त्रुटि है, उन सभी परिवारों के पंजीकरण के लिए दिनांक 15 अगस्त, 2016 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी के साथ आरएसबीवाई के लाभार्थियों(जिनका तत्काल व्यवस्था हेतु आरएसबीवाई का कार्ड पर ही एमएसबीवाई का लाभ दिया जा रहा है।) का भी एमएसबीवाई का कार्ड बनाने की प्रक्रिया की जा रही है। राज्य नोडल एजेन्सी द्वारा इस योजना के सफल संचालन हेतु सभी जनपदों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी रैंक के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। तथा जिला अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में गांव स्तर पर कार्यरत आशा को कार्ड बनाने एवं लाभार्थी तक पहुंचाने की व्यवस्था निर्धारित की गयी है। राज्य स्तर पर हैल्पलाईन भी बनायी गयी है। ताकि जनपदों से प्राप्त किसी भी प्रकार की तकनीकि समस्याओं अथवा सूचनाओं को त्वरित स्तर पर उपलब्ध कराया जा सके। इस हेतु राज्य स्तर पर टोल फ्री नम्बर 18001801200 को कार्यशील बनाया गया है। जिस पर प्रतिदिन 200 से अधिक व्यक्तियों द्वारा एमएसबीवाई के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है। इस योजना के दूसरे चरण को संचालित करने के लिए निजी क्षेत्र की बीमा कम्पनी मै. बजाज आलियान्ज जनरल इन्श्योरेन्स, को निविदा के माध्यम से अनुबन्धित किया गया है। बीमा कम्पनी के अध्यक्ष टीए रामालिगम द्वारा जानकारी दी गयी है कि उनके स्तर से राज्य के सभी जिलों में टीपीए नियुक्त कर दिये गये है जो एमएसबीवाई के लाभार्थियों को बीमारी की दशा में उनके द्वारा चयनित अस्पताल से ईलाज प्राप्त करने में सहायता करेगा। इस योजना में उपचार के लिए लाभार्थी को निर्धारित सीमा के अन्तर्गत किसी भी प्रकार का व्यय नहीं करना है और निर्धारित सीमा तक उपचार नकदरहित रूप में प्राप्त होगा। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री दिनेश धनै, अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं राज्य नोडल अधिकारी(एमएसबीवाई) डा. नीरज खैरवाल, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डा. कुसुम नरियाल तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

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