लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ का महत्व छठ देवी सूर्य देव की बहन थी

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लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ का महत्व छठ देवी सूर्य देव की बहन थी
बिहार लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ का हिंदू धर्म में अलग महत्व है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान सूर्य देव को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। बिहार में इस पर्व का खास महत्व है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। भारत में बिहार सहित कई राज्यो में इसका बड़ा प्रभाव देखा गया है लगातार ये पर्व एक बड़ा आयोजन होता जा रहा है उत्तराखंड सरकार ने राज्य में इस पर्व को लेकर सरकारी अवकाश भी किया है इस पर्व को लेकर नदी किनारे उत्तराखंड उत्तर प्रदेश,दिल्ली बिहार सहित दूसरे राज्यो में भी काफी रौनक देखी गयी शाम को सूर्य देवता को जल देकर पूजा की गयी
सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध छठ पर्व मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण भी छठ कहलाता है। छठ का पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली चैत्र मास तथा दूसरी कार्तिक मास में मनाए जाने का विधान है। चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाई जाने वाली छठ पूजा चैती छठ तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी को मनाए जाने वाला कार्तिकी छठ पूजा कहलाती है।

हिंदू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्‍‌नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अ‌र्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

पारिवार की सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए मनाया जाने वाला छठ का पर्व नहाय खाय से शुरू होकर उषा अ‌र्घ्य या पारण [चार दिनों] तक चलता है।
स्त्री-पुरुष समान रूप से छठ का पर्व मनाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार यह कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी को समाप्त होता है।तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दोपहर बाद ढलते सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। इससे पूर्व दिन में ठेकुआ का प्रसाद बनाया जाता है। बांस के सूप में ठेकुआ के अलावे चावल के लड्डू, जिसे लड़ुआ भी कहा जाता है, सांचा एवं फल सजाकर तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अ‌र्घ्य दान संपन्न किया जाता है।

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