‘रावण’ की प्रेम कहानी का उत्तराखंड कनेक्शन

0
88

देहरादून भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ ‘रावण’ की प्रेम कहानी उत्तराखंड में शुरू हुई थी। चंद्रशेखर आजाद की प्रेमिका हरिद्वार जनपद के ज्वालापुर की रहने वाली है। प्रेमिका से रावण की कई सालों से नजदीकी है। वह यहां आकर प्रेमिका को लेकर फरार हुआ था। देवभूमि से हमेशा किसी न किसी बड़ी खबर का वास्ता रहता आया है ऐसे में मीडिया की सुर्खिया बने रावण का कैसे देवभूमि से संपर्क रहा है देवभूमि के हरिद्वार जनपद का ज्वालापुर रावण की प्रेमिका का वही ठिकाना था जहा वो सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुए दंगों के बाद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण चर्चाओं में आया था।

उसकी रिहाई के बाद उत्तर प्रदेश में राजनैतिक समीकरण अलग सा नज़र आ रहा है बीजेपी रावण की रिहाई को लेकर आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में सवर्णों का विरोध झेल रही भाजपा क्या इस दांव से दलितों के दिल जीत पाएगी? और रावण की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को क्या बसपा के खिलाफ भाजपा इस्तेमाल कर पाएगी? इसका भी आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन इतना तो तय है बीजेपी रावण को लेकर इसका इस्तेमाल राजनैतिक रण में जरूर करेगी।

बता दें कि सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुए दंगों के बाद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण चर्चाओं में आया। दंगा भड़काने का उसी को मुख्य आरोपी माना जा रहा है। यूपी पुलिस तब से उसकी तलाश कर रही थी। चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की लोकेशन सहारनपुर पुलिस को हरिद्वार में मिली थी।
तब सहारनपुर पुलिस ने दबिश भी दी थी, लेकिन वह तक फरार हो चुका था। दरअसल, रावण ज्वालापुर में अपनी प्रेमिका के सहारे ही शरण लिए हुए था। जब उसे पता चला कि यूपी पुलिस उस तक पहुंच सकती है तो वह प्रेमिका को लेकर फरार हो गया था।

उस वक्त वह कई राज्यों की यात्रा करते हुए डलहौजी, हिमाचल प्रदेश पहुंचा था। तब तक यूपी पुलिस को पता नहीं था कि वो अपनी प्रेमिका के साथ है। जब उसके मोबाइल फोन नंबरों को खंगाला गया तो ज्वालापुर की एक युवती का भी नंबर ट्रेस हुआ। तब खुलासा हुआ कि रावण की प्रेमिका यहां की रहने वाली है और उसके साथ ही है।

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद चंद्रशेखर ने देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में दाखिला लिया। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने लॉ की पढ़ाई भी देहरादून के डीएवी कॉलेज से ही की। डीएवी कॉलेज छात्रों की संख्या के मामले में उत्तराखंड का सबसे बड़ा कॉलेज है और इसके छात्र संघ का प्रदेश की राजनीति तक में ठीक-ठाक दखल होता है। चंद्रशेखर यहां छात्र संघ चुनावों में भी सक्रिय रहा करते थे।

'रावण' की प्रेम कहानी का उत्तराखंड कनेक्शन
सहारनपुर में मई 2017 की जातीय हिंसा के आरोपी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ‘रावण’ की राज्य सरकार की ओर से जेल से रिहाई का फैसला अकारण नहीं है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना और दूसरा लोकसभा चुनाव से पहले दलितों के प्रति हमदर्दी का संदेश देना।
दरअसल, रावण की सभी मामलों में पहले ही जमानत हो चुकी थी और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत ही उसकी महज 26 दिन की कारावास अवधि शेष थी। ऐसे में इस फैसले को ही नहीं, बल्कि भाजपा को भी सियासी नफा-नुकसान की तराजू में तौला जाएगा।

बड़ा सवाल है कि सवर्णों का विरोध झेल रही भाजपा क्या इस दांव से दलितों के दिल जीत पाएगी? और रावण की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को क्या बसपा के खिलाफ भाजपा इस्तेमाल कर पाएगी?

2 अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान हिंसा और फिर 6 अगस्त को एससी-एसटी एक्ट के मूल स्वरूप को बहाल करने के फैसले से केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी देश भर में सवर्ण जातियों के निशाने पर है। उधर 2019 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को दलित विरोधी दाग छुड़ाने में हर संभव प्रयास लगातार करने पड़ रहे हैं।

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments