चंद्र ग्रहण पर विशेष : जानें ग्रहण का समय, उसके दुष्प्रभाव और उनसे बचने के उपाय तथा मन्त्र, जाप विधि

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चंद्र ग्रहण पर विशेष : Chandra Grahan 2018

जानें ग्रहण का समय, उसके दुष्प्रभाव और उनसे बचने के उपाय तथा मन्त्र, जाप विधि 

साल 2018 का सबसे पहला ग्रहण लगने को तैयार है, इस वर्ष चंद्र ग्रहण का योग सभी के जीवन को प्रभावित कर सकता है अर्थात यह ग्रहण अधिकांश में अपने साथ विपरीत प्रभावों को लेकर आने वाला है. खग्रास नाम के इस चंद्र ग्रहण का योग करीब 35 वर्ष बाद आया है. इससे पहले 1983 में यह योग बना था. खग्रास पूर्ण चंद्र ग्रहण इसके बाद 150 साल बाद दिखाई देगा. यदि विशेषज्ञों की मानें तो यह ग्रहण बीमार बच्चों व अतिवृद्धों को छोड़ कर सूतक काल में नकारात्मक प्रभावी रेडिएशन पड़ने के कारण सभी राशियों के जातकों के लिए नुकसान दायक हो सकता है.

जानिए सूतक, ग्रहण और दान का समय :

ग्रहण शाम 5:18 से 8:42 तक रहेगा वही सूतक सुबह 8:18 से शुरू होकर 5.18 तक रहेगा. प्रबल सूतक दोपहर 1:18 बजे से और दान का समय शाम 7:39 से 8.42 तक है.

ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के कपाट सूतक लगते ही बंद हो जाएंगे. दिल्ली और उसके आस-पास चन्द्र उदय का समय शाम 5.58 मिनट से है. इस प्रकार आसपास के क्षेत्र में चन्द्र ग्रहण भी शाम 5.58 बजे से ही प्रारम्भ होगा.

ग्रहण के समयकाल में रखें इन बातों का विशेष ध्यान :

अपने खाद्य व पेय पदार्थों में गंगाजल व तुलसी डालना न भूले, तुलसी के पत्तो में पारा होता है जिससे नेगेटिव ऊर्जा कम होती है. तुलसी डालने से हानिकारक ग्रहण के रेडिएशन के कुप्रभाव शिथिल हो जाते हैं. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि ग्रहण सूतक काल में न तो मिक्सी चलायें, न ही तेज धारदार चाकू आदि से कोई फल, सब्जी काटें अन्यथा उस खाद्य पदार्थ में नकारात्मक ऊर्जा की तीखी हानिकारक तरंगें प्रवेश कर सकती हैं. शास्त्रों के अनुसार गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल के दौरान बाहर निकलना निषेध माना जाता है, और इस दौरान उन्हें अपने पेट, कमर में गंगाजल डाल कर गेरु का लेप करना चाहिए तथा कुशा का आसन पेट के चारों ओर लपेट कर विश्राम करें और ग्रहण न देखें. ग्रहण काल के दौरान आलस्य ना करें. ग्रहण विभिन्न राशियों के जातकों द्वारा पूजा पाठ करने से ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है. इसके लिए कई राशियों के अनुसार विभिन्न पूजन का लाभ लिया जा सकता है.

ग्रहणकाल लगने से पहले स्नान कर लें, अगर आप बीमार नहीं है तो ग्रहण काल में भोजन और भौतिक कार्य ना करें. भगवान् का भजन कीर्तन शुभ फलदायी होता है, अतएव कीर्तन भजन व् जाप अवश्य करें. भगवन शिव कि पूजा अर्चना करे. ग्रहण हटने के बाद स्नान करे यदि स्नान न कर सके तो हाथ पैर धोकर कपडे बदल लें, माना जाता है कि सूतक उतरने के बाद शारीरिक शुद्धि के लिए ये सब किया जाता है. ग्रहण कि रात या अगले दिन अन्न आदि का दान अवश्य देवें.

जानें ग्रहण का राशियों पर प्रभाव :

मेष- शारीरिक मानसिक रोग व अशांति रहेगी

वृष- धन लाभ के योग से अनुकूल बनेंगे

मिथुन- आर्थिक हानियों से अशुभ

कर्क : दुर्घटना आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है

सिंह- धन व स्वास्थ्य हानि से अशुभ

कन्या- धन लाभ व उन्नति के योग हैं

तुला- सुख समृद्धि में वृद्धि होगी

वृश्चिक- अपमान, चिंता, अपयश कि सम्भावना के योग

धनु- अकास्मिक समस्या, दुर्घटना

मकर- दाम्पत्य सुख में कमी आएगी

कुंभ- सफलता व सुख प्राप्ति होगी

मीन- शारीरिक मानसिक पीड़ा रहेगी

ग्रहण के कारण विभिन्न राशियों पर पढ़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए दान और मंत्र से लाभ मिलेगा. इस बार ग्रह योगों की स्थिति अनुसार खाद्य पदार्थ, कपड़ों का दान जरुरतमंदों का करना लाभकारी होता है.

दान की विशेष सामग्री:

नारियल, चार सौ ग्राम बदाम, आठ सौ ग्राम काली उड़द और आधा लीटर सरसों का तेल दान करें.

कहते हैं कि ग्रहण के समय में देवताओं कि शक्ति कम हो जाती है और उनकी शक्ति को बल देने के लिए मन्त्र, जाप आदि का उच्चारण किया जाता है, शंख घंटे बजाए जाते है ताकि ग्रहण के बल को कमजोर किया जा सके. ग्रहण से पूर्व चन्द्रमा को बल देने के लिए ऊँ सोम सोमाय नम: और ग्रहण काल में ग्रहण लगाने वाले केतु का बीज मंत्र ऊँ केम केतुवे नम: समेत ग्रहण उतरने के बाद पुन: चन्द्रमा का मंत्र ऊँ सोम सोमाय नम: का जाप अवश्य करें.

यह चन्द्र ग्रहण कर्क राशि के पुष्य अष्लेशा नक्षत्र में पड़ रहा है इसलिए जो जातक इनमें जन्म लिये हैं उन्हें विशेष रूप से ग्रहण के कुप्रभावों से बचने के सभी साधन व दान, जप अवश्य करने चाहिए. इस ग्रहण के दौरान मंगल की युति बनने के कारण मेष, कर्क, कुंभ, सिंह राशियों के लिए थोडी हानि हो सकती है. इससे बचने के लिए मंगल का दान करें.

ग्रहण का न केवल धार्मिकता से सम्बन्ध है अपितु वैज्ञानिकता भी इससे परे नहीं है. तांबे (copper ) के कलर सा दिखने वाला यह चंद्र ग्रहण कुछ ऐसा दिखेगा :

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