केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को ईएपी फंडिंग पैटर्न में दी राहत

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केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को ईएपी फंडिंग पैटर्न में दी राहत

देहरादून, विधानसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र सरकार ने राज्य की मुराद पूरी कर दी। बाह्य सहायतित योजनाओं (ईएपी) में फंडिंग पैटर्न 90:10 को वर्ष 2019 तक बहाल रखा गया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से कई दफा मुलाकात कर ईएपी में फंडिंग पैटर्न में बदलाव नहीं किए जाने की पुरजोर पैरवी की थी।
केंद्र के दर पर राज्य सरकार की दस्तक बेकार नहीं गई है। दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से ईएपी फंडिंग पैटर्न में बदलाव के संकेत दिए गए थे। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों में पहले ही मात खा चुके उत्तराखंड के माथे पर इससे बल पड़ गए थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से इस संबंध में कई बार मुलाकात की। उन्होंने ईएपी फंडिंग पैटर्न बदलने से राज्य को बड़ा नुकसान झेलने का अंदेशा जाहिर किया था।
विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने कांग्रेसनीत सरकार की बात मानकर राज्य को तोहफा दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्य को पत्र भेजकर ईएपी फंडिंग पैटर्न नहीं बदलने और इसे 14वें वित्त आयोग की अवधि यानी वर्ष 2019 तक जारी रखने की जानकारी दी है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस फैसले का लाभ उत्तर-पूर्वी राज्यों समेत हिमालयी राज्यों को दिया है। उत्तराखंड के साथ हिमाचल और जम्मू-कश्मीर को भी यह लाभ मिलेगा। केंद्र के इस फैसले से राज्य को पहले की भांति ही ईएपी की 80 फीसद ऋण राशि में केंद्रीय हिस्सेदारी 90 फीसद और राज्य की हिस्सेदारी 10 फीसद रहेगी। ईएपी के तहत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली धनराशि में 80 फीसद हिस्सा ही ऋण के रूप में होता है। शेष 20 फीसद राशि की काउंटर फंडिंग राज्य को करनी पड़ती है। इस हिसाब से राज्य को कुल धनराशि का 72 फीसद केंद्र से मिलता है
यदि ईएपी फंडिंग पैटर्न में केंद्रीय अंशदान 90 फीसद से घटता तो विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड की मुश्किलें बढ़ना तय था। राज्य को सालाना तकरीबन 2000 करोड़ ईएपी के जरिए प्राप्त हो रहे हैं। बीते वर्ष भी नवंबर माह में ही केंद्र सरकार ने उत्तराखंड समेत तीन हिमालयी राज्यों को अधिकतर केंद्रपोषित योजनाओं के फंडिंग पैटर्न में 90:10 कर बड़ी राहत दी थी। नवंबर माह ईएपी के लिहाज से राज्य के लिए शुभ साबित हुआ है। केंद्र के इस फैसले से खुश राज्य सरकार ने तमाम महकमों को तुरंत पत्र भेजकर ईएपी में 90:10 के फंडिंग पैटर्न के मुताबिक जल्द प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। महकमों से मिलने वाले प्रस्तावों की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति स्क्रीनिंग करती है। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। वित्त सचिव अमित नेगी ने ईएपी फंडिंग पैटर्न बरकरार रहने के बारे में केंद्र का पत्र मिलने की पुष्टि की।

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