उत्तराखंड के लिए सौतेली माँ है भाजपा अमित शाह पड़ो ये पत्र सच आएगा सामने

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उत्तराखंड के लिए सौतेली माँ है भाजपा अमित शाह पड़ो ये पत्र सच आएगा सामने 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नाम शंकर सिंह भाटिया का खुला पत्र
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
माननीय अमित शाह जी
देहरादून अभी हाल में आपने उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक चुनावी रैली कर राज्य में चुनावी रणभेरी बजाई थी। आपने अपने भाषण में कई बातें कही, आपके समर्थकों के लिए आपके कहे शब्द पवित्र बातें होंगी, लेकिन विरोधियों को उनमें से बहुत सारी बातें जचीं नहीं। उत्तराखंड में हमारे जैसे बहुत सारे लोग ऐसे भी होंगे जो आपकी सही बात का समर्थन करते होंगे, लेकिन गतल बात को सहन करने के लिए तैयार नहीं हैं।
आपके भाषण में खलने वाली बात जो मुझे लगी, वह थी भाजपा को उत्तराखंड की मां कहना। दो तीन दशक पहले बनी एक राजनीतिक पार्टी देवभूमि उत्तराखंड की मां कैसे हो सकती है? उत्तराखंड राज्य जनता के सतत संघर्ष का परिणाम है, यदि जनता के संघर्ष को नकार कर आप भाजपा को इसका श्रेय देते हैं, तो आप वास्तविकता से मुंह मोड़ रहे हैं। आपको इतिहास ज्ञात होगा, जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने वाले शासकों को जनता जमीन सुंघा देती है।
यदि आप फिर भी भाजपा को उत्तराखंड की मां मानते हैं तो भाजपा उत्तराखंड की क्रूर सौतेली मां है। इसके बहुत सारे प्रमाण मैं आपको इसी पत्र में दे रहा हूं। आप अभी कुछ साल पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। इससे पहले आपकी राजनीति गुजरात तक ही केंद्रित रही है। सन् 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था, आप गुजरात तक ही सीमित थे। इसलिए संभवतः आपको उस उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 के बारे में पता नहीं होगा। उत्तराखंड के बारे में कुछ बोलने से पहले आपको इस अधिनियम का अध्ययन जरूर करना चाहिए, अध्ययन किए बिना इसी तरह से बोलेंगे तो आपकी बातें बचकानी लगेंगी, जो किसी सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कम से कम शोभा नहीं देती हैं।
शाहजी आपको इतना तो पता होगा कि जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था, तब केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम जब उत्तर प्रदेश विधानमंडल को भेजा गया था, उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने उसमें संशोधन करते हुए 26 बिंदुओं का संशोधन प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। जिसमें उत्तराखंड की सीमा के अंतर्गत नदी प्रणालियों, पारेषण लाइनों, जमीनों, तालाबों, नहरों पर उत्तर प्रदेश के अधिकार स्थापित किए गए थे। गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाकर गंगा और उसकी सहायक नदियों समेत यमुना नदी प्रणाली पर उत्तर प्रदेश के अधिकार सुनिश्चित किए गए थे।
आप सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसलिए भारतीय संविधान की भावना को आप अच्छी तरह से समझते होंगे। भारतीय संविधान का अनुच्छेद तीन कहता है कि जब किसी राज्य का विभाजन होकर नया राज्य बनता है तो उस राज्य की भौगोलिक सीमा के अंतर्गत सभी चल अचल परिसंपत्तियों पर उस नए बने राज्य का अधिकार होता है। आप जिस राज्य की मां होने का दावा कर रहे हैं, सोलह साल बाद भी उस राज्य उत्तराखंड की सीमा के अंदर 13 हजार हेक्टेयर से अधिक सिंचाई विभाग की भूमि पर आपने उत्तर प्रदेश को कब्जा क्यों दिया हुआ है? उत्तराखंड के सिंचाई विभाग के 14 हजार से अधिक आवासीय और कार्यालयी भवनों पर अभी भी उत्तर प्रदेश क्यों काबिज है? 31 ऐसी नहरें जिनके हेड और टेल उत्तराखंड की सीमा के अंदर हैं, वह उत्तर प्रदेश के कब्जे में क्यों हैं? उत्तराखंड की सीमा के अंदर तीन बैराज, कई झीलों, तालाबों, औद्योगिक क्षेत्रों, आवास विकास की भूमि पर उत्तर प्रदेश को आपने क्यों काबिज किया हुआ है? जो टिहरी परियोजना पूर्ण रूप से उत्तराखंड में स्थित है, जिसके लिए उत्तराखंड के सौ से अधिक गांव एक दर्जन से अधिक कस्बे, ऐतिहासिक टिहरी शहर को डुबा कर सवा लाख से अधिक लोगों को विस्थापित किया गया था, उस टिहरी परियोजना पर उत्तराखंड का हिस्सा 25 प्रतिशत होना चाहिए था, आपकी सरकार ने उस 25 प्रतिशत हिस्से पर उत्तर प्रदेश को क्यों काबिज किया हुआ है?
नैनीताल हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को उत्तराखंड की परिसंपत्तियां लौटाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मध्यस्त बनकर परिसंपत्तियों का उचित बंटवारा करने का निर्देश दिया था। आपकी केंद्र सरकार ने इन करीब ढाई सालों में उत्तराखंड का एक भी हक उसे लौटाया है? जो भाजपा संविधान के विरुद्ध जाकर उत्तराखंड की परिसंपित्तयां उत्तर प्रदेश को सौंपती है, उससे इन परिसंपत्तियों को लौटाने की अपेक्षा की जा सकती है?
यदि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश आपके बेटे हैं तो उत्तराखंड आपका सौतेला बेटा है? तभी तो उसकी परिसंपित्तयों को आपकी पार्टी ने सगे बेटे उत्तर पद्रेश को सौंपा हैं? क्या आपकी पार्टी क्रूर सौतेली मां नहीं है? जो उत्तराखंड के साथ इतना सौतेला व्यवहार कर रही है? इस क्रूर सौतेली मां भाजपा के उत्तराखंड के नेता अपनी कुर्सी को सुरक्षित रखने के चक्कर में इस कदर केंद्रीय और यूपी के नेताओं के सामने नतमस्तक हुए हैं कि उन्होंने उत्तराखंड का पक्ष रखने तक की हिम्मत नहीं दिखाई है।
आपकी पार्टी के एक बड़े केंद्रीय नेता गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड आंदोलन के एक सबसे बड़े बिलेन तत्कालीन मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह को इस कदर संरक्षण दिया है कि वह उत्तराखंड के जख्मों पर नमक मिर्च छिड़कने से कम नहीं है। क्या कोई मां अपने बेटे के साथ ऐसा व्यवहार करती है?
शाहजी आप सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिस नाते आप उत्तराखंड में आकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, क्या आप बता सकते हैं कि उत्तराखंड की वैधानिक परिसंपत्तियां उसे सोलह साल बाद भी वापस नहीं मिली हैं, क्या आपकी सरकार अपने कार्यकाल में उत्तराखंड की परिसंपत्तियां उसे लौटाएगी? यदि नही ंतो आपको यहां आकर बड़ी-बड़ी बातें करने का कोई हक बनता है? भविष्य में भी आप उत्तराखंड में रैलियां करेंगे, यदि आप में रत्ती भर भी गैरत बची है तो आपको सबसे पहले उत्तराखंड की परिसंपत्तियों के बारे में बताना होगा, तब आप और दावें करें।
हमारे यहां कहते हैं थोड़ा कहना बहुत समझना। आप इस सत्यता को जरूर समझते होंगे, इसलिए आपसे अपेक्षा है कि आप उत्तराखंड की परिसंपत्तियों के बारे में सत्यता बताएं। तब अपनी अन्य बातें रखें।
आपका
शंकर सिंह भाटिया
उत्तराखंड के बेबाक पत्रकार शंकर सिंह भाटिया का ये पत्र उनके वेब पोर्टल उत्तराखंड समाचार से लिया गया है

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