भगत सिंह कोश्यारी नाराजगी बनेगी २०१७ में भाजपा रेड लाइट

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भगत सिंह कोश्यारी नाराजगी बनेगी २०१७ में भाजपा रेड लाइट

bhagat singh koshyari upset 2017 bhajpa red light 

देहरादून उत्तराखंड भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा अगर ठीक होता तो भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी भाजपा से दूरी बनाकर अपनी नाराजगी व्यक्त नहीं करते कांग्रेस के बागी रत्नों को अपने कुनबे में शामिल किये को लेकर भाजपा के अंदर विढ्रोह सामने आया था। यही कारण है राज्य में भाजपा चुनावी महाभारत २०१७ में जाने से पहले जिस तरह अपनी राजनैतिक ताकत को जनता के बीच रख रही है। उस में कही न कही भगत सिंह कोश्यारी की नाराजगी साफ तोर पर देखी जा रही है दिल्ली में कोर ग्रुप की हुई दोनों बैठक में भी भगत सिंह कोश्यारी नहीं पहुचे थे यही नहीं उत्तराखंड के भीमताल और कई जगह पर हुई भाजपा की बैठको में भी कोश्यारी नदारद रहे है।

राज्य में वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ भाजपा के पास कोई नेता जहा नज़र नहीं आ रहा है वही ऐसे समय में भगत सिंह कोश्यारी की नाराजगी भाजपा के लिए खतरे का संकेत बनी हुई है जनता और भाजपा वर्कर्स के बीच भगत दा का अपना कद भाजपा के लिए राजनैतिक फायदे के रूप में इस्तमाल हो सकता है। लेकिन जिस तरह भाजपा के उत्तराखंड के बड़े नेता भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी दूरिया भाजपा की कोर ग्रुप बैठको से लेकर उत्तराखंड भाजपा की बैठको में दिखयी है वो कही न कही भाजपा के लिए रेड लाइट की तरह नज़र आ रही है।

अजय भट्ट पर लटक रही हाई कमान की तलवार

उत्तराखंड भाजपा में अजय भट्ट भाजपा के अध्यक्ष पद पर अभी तक राज्य में भाजपा कार्यकर्त्यों के बीच अपनी ऊर्जा से ऐसा कोई करिश्मा नहीं कर पाए है। जिस की बदलौत भाजपा के अंदर ऊर्जा का संचार होता नज़र आये बल्कि अजय भट्ट का बीते दिनों शराब पीकर ब्राह्मण पर की गयी विवादित बयान को लेकर पुरे उत्तराखंड में गलत सन्देश गया है वर्तमान समय में राज्य की जनता के साथ साथ ब्राह्मण समाज भाजपा से नाराज़ बताया जा रहा है।यही नहीं भाजपा अभी तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर भी कोई फैसला नहीं ले पायी है अजय भट्ट दोनों पदों पर काबिज वर्तमान समय में है जब की मदन कौशिक नेता प्रतिपक्ष को लेकर भाजपा की लाइन में बने हुए है।

२०१७ की राजनैतिक महाभारत बिना सेनापति के लडेगी भाजपा

उत्तराखंड भाजपा को वर्तमान समय में दिल्ली के बड़े नेता रिमोट कन्ट्रोल की तरह इस्तमाल कर रहे है। यही वजह है की भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष भी कोई फैसला अपनी मर्ज़ी से नहीं ले सकता सतपाल महाराज,भुवन चंद खंडूरी रमेश पोखरियाल निशंक तक को वर्तमान समय में भाजपा कोई ताकत नहीं दे रही है। मतलब साफ हो गया है की उत्तराखंड भाजपा में २०१७ की राजनैतिक महाभारत में जाने से पहले भाजपा अपना सेनापति किस को बनाएगी ये फैसला भी अभी तक भाजपा नहीं ले पायी है। राजनैतिक सूत्रों की माने तो भाजपा उत्तराखंड में किसी को भी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं करेगी क्योकि भाजपा को सम्भवाना है की अगर राज्य में मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर चुनाव में जाया गया तो कही दिल्ली में किरण बेदी जैसे हालात पैदा न हो जाये। अब देखना होगा की भाजपा उत्तराखंड में भगत सिंह कोश्यारी की नाराजगी को दूर करने के लिए क्या फार्मूला ईजाद करती है।

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