बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू

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बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया  शुरू

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई। शनिवार को गणेश पूजा के साथ गणेश मंदिर के कपाट इस वर्ष के लिए बंद कर दिए गए। बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ने पूजा-अर्चना की। 16 नवंबर को तीसरे पहर 3:45 बजे भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। आज बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि शनिवार को गणेश पूजा के साथ गणेश मंदिर के कपाट इस वर्ष के लिए बंद कर दिए गए। सुबह 10 बजे वेद मंत्रोच्चार के बीच रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी की अगुवाई में पूजा अर्चना के उपरांत गणेश जी को उनके शीतकाल के यथास्थान पर विराजित किया गया। 13 नवंबर को भगवान आदि केदारेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। 14 नवंबर को खडक पुस्तक की पूजा कर वेद ऋचाओं को शीतकाल के स्थान पर रखा जाएगा। 15 नवंबर को महालक्ष्मी की विशेष पूजा के साथ उन्हें गर्भगृह में छह माह के लिए आने का न्योता दिया जाएगा। इसके बाद 16 नवंबर को दोपहर 3:45 बजे भगवान बदरी विशाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर उद्वव जी, कुबेर जी व शंकराचार्य गद्दी पांडुकेश्वर व जोशीमठ लाई जाएगी।

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