अयोध्या राम मंदिर विवाद को लेकर रविशंकर की कोशिश कहाँ तक सफल: Ayodhya Ram Mandir controversial matter

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अयोध्या राम मंदिर विवाद को लेकर रविशंकर की कोशिश कहाँ तक सफल: Ayodhya Ram Mandir controversial matterram-janmabhoomi-ayodhya

अयोध्या राम मंदिर विवाद में अभी तक कोई भी निर्णय मिलता नजर नहीं आ रहा है. जिस प्रकार इस वर्ष उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अयोध्या में सवा लाख दीप प्रज्जवलित कराकर नगरी को सुशोभित किया उससे समस्त हिन्दू समुदाय में आशा के दीप भी जले होंगे. वहीँ राम मंदिर मामले को लेकर 15 नवंबर को श्री रविशंकर UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे लेकिन इसका भी को सुखद परिणाम देखने को नहीं मिला, श्री श्री के साथ मुलाकात में हुई बातचीत को लेकर योगी ने यह कहकर बात को विराम दे दिया कि श्री श्री को लखनऊ आना था तो वे मुझसे भी मिले और मुख्यमंत्री का यह भी कहना था कि मुझे नहीं लगता कि बातचीत से कोई हल निकलेगा यदि ऐसा होता तो ये मामला कबका सुलझ गया होता, लेकिन यदि फिर भी कोई सम्भाबना है तो इसमें कोई बुराई नहीं है. 5 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. सरकार अपनी तरफ से फिलहाल कोई पहल नहीं करेगी, जबकि केस सुप्रीम कोर्ट में है.

वहीँ पूर्व बीजेपी सांसद राम विलास वेंदाती ने कहा कि मध्यस्थता करने वाले श्री श्री रविशंकर कौन हैं? उन्हें अपना NGO चलाना चाहिए और विदेश से फंड लेना चाहिए. मेरा मानना है कि उनके पास बहुत पैसा है, जांच से बचने के लिए वे राम मंदिर मुद्दे में कूद गए हैं.

वहीँ बातचीत से राम मंदिर विवाद के हल को लेकर शिया वक्फ बोर्ड में दो फाड़ होती दिख रही है. इसके एक गुट ने रविशंकर की पहल का विरोध किया है. इसके पहले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने आपसी सुलह से मंदिर बनाने का समर्थन किया. लेकिन ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने बातचीत की कोशिशों को नकार चुके मुस्लिम लॉ बोर्ड के साथ जाने का फैसला किया है. शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, ”अयोध्या विवाद पर हमारी कम्युनिटी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं. हमें कोई ऐसा फॉर्मूला मंजूर नहीं है जिससे यह संदेश जाए कि मुस्लिम पक्ष ने सरेंडर कर दिया. हम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानेंगे. शिया बोर्ड के प्रेसिडेंट और मुस्लिम लॉ बोर्ड के मेंबर, मौलाना जहीर अब्बास रिजवी ने कहा, ”राम मंदिर विवाद पर सरेंडर करने का सवाल ही नहीं उठता. फिलहाल जिस फॉर्मूले पर समझौते की बात चल रही है, उससे साफ है कि कुछ लोग चाहते हैं मुस्लिम सरेंडर कर दें. कुछ लोग कौम के नाम पर राजनीति करने में लगे हैं”

गुरुवार को श्री श्री रविशंकर ने सबसे पहले नृत्य गोपाल दास से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने रामलला के दर्शन किए. इसके बाद वे मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी और हाजी महबूब से मिलने जाएंगे. अयोध्या विवाद में तीन पक्ष मुख्य रूप से हैं जो अपनी अपनीं तरफ से दावा करते है कि इन नीचे दी गयी वजह से वह स्थान उनके पक्ष में सौपा जाना चाहिए.

१- निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से
करता रहा है. लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए.
२- रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं. चूंकि
भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान
पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं.
३- सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी. मुस्लिम वहां
नमाज पढ़ते रहे हैं. इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए.

अब देखना यह है कि 5 दिसम्बर को होने वाली सुनवाई में अयोध्या विवाद को लेकर क्या परिणाम निकलकर आते हैं.

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