अटल बिहारी वाजपेई,राजनैतिक भीष्म पितामाह का निधन

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अटल बिहारी वाजपेई, राजनैतिक भीष्म पितामाह का निधन :ATAL BIHARI BAJYPEE NIDHAN

नई दिल्ली।  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई आखिर जिंदगी की जंग हार गए अपने जीवन काल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कभी भी हार नहीं मानी अपनी एक कविता के माध्यम से अटल जी ने कहा था हार नहीं मानूँगा,लेकिन जिंदगी की जंग में आखिर मौत उनको अपनी चौखट पर लेकर चली गयी उनका निधन देश के लिए एक बड़ी हस्ती को खोने जैसा है, वही देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना राजनैतिक भीषम पितामाह भी खो दिया है, भारत की राजनीती को शिखर तक पहुंचाने वाले अटल बिहारी का निधन बीजेपी सहित देश के लिए काफी बड़ी हानि है भाजपा सहित कई दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी दिल्ली पहुंचे गए है।

अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर पुरे देश में राजकीय शोक की घोषणा की गयी है अटल बिहारी ने भारत की राजनीती को इतनी ऊंची पहुंच दी जिसको अभी तक कोई भी राजनेता भारत में नहीं दे पाया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का जन्म ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था और बचपन से ही अटल बिहारी वाजपेई राष्ट्रभक्ति की तरफ प्रेरित रहे थे उनकी शिक्षा b.a. तक ग्वालियर में हुई उसके बाद उन्होंने DAV कॉलेज कानपुर से m.a. की परीक्षा उत्तीर्ण की थी इसके बाद एलएलबी की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ कर वह संघ के काम में जुट गए 1946 में अटल बिहारी वाजपेई ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ लखनऊ आकर राष्ट्रधर्म के संपादन का कार्य संभाला था कवि पत्रकार होने के साथ-साथ एक परिपक्व राजनीतिक सोच के कारण अटल की ख्याति दिनों दिन लगातार बढ़ती गई।

विख्यात राष्ट्रवादी श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सानिध्य में उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा और भी आगे बढ़ी 1955 के चुनाव में लखनऊ से जनसंघ के प्रत्याशी के तौर पर वे सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर गए और 1957 में अटल जी ने पहली बार बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया अपनी प्रखर एवं विशिष्ट भाषण शैली से उनकी पहचान देश के अग्रणी नेता के रूप में जल्द ही बन गई 1980 में अटल जी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक के साथ ही उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने देश की राजनीति मुख्यधारा में भाजपा के उदय के पर्याय अटल जी ने प्रथम बार 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली इसके पश्चात 19 मार्च 1998 को दूसरी बार तथा 13 अक्टूबर 1999 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने वाले वह देश के तीसरे प्रधानमंत्री बने।

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