धरती के भगवान ने नहीं दिया जीवन दान

0
293

धरती के भगवान ने नहीं दिया जीवन दान
डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है मानवता को भी दर किनार कर उत्तराखंड में एक नवजात को अपनी जिंदगी में आने के बाद डॉकटरो की हड़ताल के कारण उसे अपनी जिंदगी को अलविदा कहना पड़ा इस तरह के मामले कई बार सामने आ चुके है लेकिन भगवान रुपी डॉक्टर इंसानियत को ताक पर रख कर इसी तरह का फार्मूला मरीजों के साथ करते आये है
मासूम तड़पता रहा, लेकिन धरती के भगवान का दिल नहीं पसीजा। एक घंटे तक पिता गिड़गिड़ता रहा मगर हड़ताल का हवाला देकर डाक्टरों ने उसके नवजात शिशु को देखने से इन्कार कर दिया। इससे मासूम की मौत हो गई। मानवता और कर्तव्यनिष्ठा को तार-तार कर देने वाला यह दृश्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार की शाम को देखने को मिला। जब खेतलसंडा मुस्ताजर गांव के विनोद चंद अपने दो दिन के नवजात शिशु को दिखाने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। खेतलसंडा मुस्ताजर के विनोद चंद की पत्नी पूजा चंद ने सीएचसी में 20 अप्रैल की रात को एक पुत्र को जन्म दिया था। जिसे 21 अप्रैल को डा.आईए खान की देखरेख में अस्पताल से छुट्टी दे दी। अचानक शुक्रवार की शाम को उसके पुत्र की तबीयत बिगड़ गयी। जिसे लेकर वे सीएचसी पहुंचे। जहां पर चिकित्सकों ने हड़ताल का हवाला देकर उसे देखने से इंकार कर दिया। विनोद एक घंटे तक अस्पताल में डाक्टरों से गिड़गिड़ता रहा। इसके बाद उसने निजी चिकित्सकों के दरवाजे भी खटखटाए। थक हार कर वह बच्चे को लेकर पड़ोसी राज्य यूपी के पीलीभीत जा रहा था। इसी बीच रास्ते में उसके पुत्र की मौत हो गयी।इस मामले पर खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी का कहना है की इस तरह के मामलो पर डॉकटरो को मानवता के नाते काम करना जरुरी है क्यों की डॉक्टर को भगवन के रूप में जान कर ही कोई भी उस के पास आता है

Bhadas 4 India देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है। भड़ास फॉर इंडिया.कॉम में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें bhadas4india@gmail.com पर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9837261570 पर भी संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज Bhadas4india भी फॉलो कर सकते हैं।

Comments

comments