आपदा की दृष्टि से 350 संवेदनशील स्थलों का चिन्हीकरण

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आपदा की दृष्टि से 350 संवेदनशील स्थलों का चिन्हीकरण :APADA UTTRAKHAND 350 DANGER ZONE
देहरादून मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सभी जिलाधिकारियों को वर्षाकाल से पूर्व आपदा से निपटने के लिए 05-05 करोड़ रूपये की धनराशि दे दी जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थानीय लोगों को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। जिन महिला मंगल दलों एवं युवा मंगल दलों को आपदा से राहत एवं बचाव की ट्रेनिंग दी गई हैं, उन्हें समय-समय पर पुनः प्रशिक्षित किया जाए। स्थानीय स्तर पर आपदा राहत एवं बचाव के लिए आवश्यक उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आई.आर.एस) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। अर्ली वार्निग सिस्टम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने भूकम्प की दृष्टि से अति संवेदनशील संस्थानों को चिन्हित करने एवं उससे बचाव के लिए प्रभावी उपाय तलाशने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधा को बढ़ाने के लिए बैलून तकनीक विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से रात्रि के समय आपदा राहत एवं बचाव के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने बैठक के दौरान उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की वेबसाइट (usdma.uk.gov.in) एवं लोगो का विमोचन किया तथा आई.आर.एस से संबंधित मोबाईल एप्लीकेशन को लाॅच किया। इसके अलावा उन्होंने सैन्डई रूपरेखा, आई.आर.एस के काॅफी टेबल बुक, युवक एवं महिला मंगल दल प्रशिक्षण, एनडीएम के सहयोग से संचालित आपदा सुरक्षा मित्र योजना एवं आईआरएस चेकलिस्ट पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लोगो के डिजाइन के लिए कंपीटिशन जीतने वाले श्री नरेन्द्र तोमर को 25 हजार रूपये की धनराशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया। आपदा में सर्च एवं रेसक्यू में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया।
पुलिस महानिदेशक श्री अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि प्रदेश में 2013 की आपदा से संबधित बड़ी घटनाओं के बाद राज्य में एसडीआरएफ का गठन किया गया। वर्तमान में 50 थानों में एसडीआरएफ तैनात है। एसडीआरएफ की 04 कंपनियां बनाई गई है। अभी तक एसडीआरएफ 341 छोटी-बड़ी आपदाओं में 4858 लोगों का रेस्क्यू किया है। 35 हजार बच्चों को आपदा से निपटने की सामान्य ट्रेनिंग तथा 8500 बच्चों को एक माह का प्रशिक्षण दिया गया है।
सचिव आपदा प्रबन्धन श्री अमित नेगी ने आपदा से निपटने के लिए की गई तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर आपदा से बचाव के लिए 900 महिला समूहों को प्रशिक्षित किया गया है। सभी जिलाधिकारियों को जीआईएस मैपिंग करने के लिए कहा गया है। 350 संवेदनशील स्थलों का चिन्हीकरण किया गया है।
बैठक में वित्त मंत्री श्री प्रकांश पंत, प्रमुख सचिव श्री आनन्द वर्द्धन, सचिव श्रीमती भूपेन्द्र कौर औलख, आईजी श्री जी.एस मार्तोलिया, निदेशक भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून श्री बिक्रम सिंह, अपर सचिव आपदा प्रबन्धन श्री सविन बंसल, अपर सचिव डाॅ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।
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