विगत तीन माह मे हुई नगण्य वर्षा के प्रभावों का करें आंकलन।

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विगत तीन माह मे हुई नगण्य वर्षा के प्रभावों का करें आंकलन।

चम्पावत कृषि, बागवानी, एवं उद्यानीय फसलों का शतप्रतिशत फसल बीमा तत्काल कराना सुनिश्चित करें। उक्त निर्देश राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विगत तीन माह में राज्य में सामान्य से 82 प्रतिशत कम बारिश होने से राज्य में कृषि फसलों को होने वाले संभावित नुकसान के आंकलन के सम्बन्ध में देर रात तक चली वीसी में राज्य के समस्त जिलाधिकारियों को दिये। मुख्यमंत्री ने आगामी माहों में वर्षा न होने तथा सूखे की स्थिति उत्पन्न होने पर वैकल्पिक फसलों हेतु तैयारी रखने के निर्देश भी वीसी में दिये। मुख्यंमत्री ने फसल बीमा योजना हेतु कृषकों में और अधिक रूचि पैदा करने के उद्देश्य से वर्तमान में कृषि फसल बीमा याजना के अन्तर्गत कृषकों द्वारा वहन की जाने वाली धनराशि का 50 प्रतिशत व्यय सरकार द्वारा वहन किये जाने को कहा। जिस कारण अब फसल बीमा योजना की मात्र 25 प्रतिशत धनराशि कृषकों द्वारा तथा 75 प्रतिशत धनराशि का सरकार द्वारा वहन की जायेगी। मुख्यमंत्री ने पैक्स के अन्तर्गत खुले कृषकों के खातों को सहकारी बैंकों में खुलवाने एवं आवश्यकतानुसार कृषि ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नगण्य वर्षा से कृषि पर अभी कम प्रभाव परिलक्षित हुआ हैं, यदि इस माह भी वर्षा कम होती है तो कृषि पर अत्यधिक नकारात्कम प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने राज्य में संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अपनेअपने जनपदों में राहत सम्बन्धी उपायपीने के पानी की व्यवस्था, पशुओं हेतु चारे एवं कृषि से सम्बन्धि आवश्यकताओं आदि की वैकल्पिक व्यवस्था अभी से ही करना सुनिश्चित कर दें। मुख्यमंत्री ने बर्षा की कमी के कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों का सामना करने हेतु राज्य के प्रत्येक बड़े जनपदों को 5 करोड़ तथा छोटे जनपदों को 2 करोड़ रूपये की धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश वित्त सचिव अमित नेगी को दिये। मुख्यमंत्री ने पूर्व में दी गयी धनराशि को आपदा प्रभावित क्षेत्रों, पेयजल, सड़क आदि को प्राथमिकता पर रखते हुए आवश्यक कार्यो में शतप्रतिशत व्यय कर एक सप्ताह में उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिये। वीसी में जिलाधिकारी डाॅ.अहमद इक़बाल ने बताया कि बर्षा की कमी को देखते हुए जनपद में पेयजल आपूर्ति हेतु 16.45 लाख रूपये की वैकल्पिक योजना बनायी गयी है तथा 10 हैण्ड पम्प व 15 सोलर लिफ्ट लगवाने की प्रक्रिया गतिमान है। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में 63 नहरें पूर्ण रूप से चालित हैं तथा 20 नहरें स्रोतों का पानी सूखने आदि के कारण पूर्ण रूप से बन्द हैं व 21 हाईड्रम सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में वर्तमान समय में गेहूॅं 7500 हेक्टेयर में, जौं 815 हैक्टेयर, चना 80 हैक्टेयर, मटर 25 हैक्टेयर, मसूर 1325 हैक्टेयर, लाही व सरसों 860 हैक्टेयर में बोया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्षा एवं नमी न होने के कारण बोयी गयी फसलों में 710 प्रतिशत की फसल हानि परिलक्षित हुई है। वीसी में मुख्य विकास अधिकारी हरगाविन्द भट्ट, अपर जिलाधिकारी हेमन्त कुमार वर्मा, एसडीएम सदर सीमा विश्वकर्मा, आपदा प्रबन्धन अधिकारी मनोज पाण्डेय, अधिशासी अभियन्ता जल संस्थान विशाल सक्सेना, मुख्य कृषि अधिकारी आरएस चन्द्रवाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.पीएस भण्डारी, जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्या, सिंचाई के अधिशासी अभियता सहित तहसीलदार सदर व लोहाघाट एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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