आबकारी आयुक्त आदेश को ठेंगा दिखा कर बड़ा बना जिला आबकारी अधिकारी

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आबकारी आयुक्त आदेश को ठेंगा दिखा कर बड़ा बना जिला आबकारी अधिकारी :ABKARI COMMISSIONER ADESH BYE PASS DISTRICT OFFICER
देहरादून उत्तराखंड में शराब निति को लेकर अधिकारी सरकार के खिलाफ बगावत का डंडा उठा कर विभागीय और जातीय समीकरण से कदम ताल कर रहे है सरकार की नाक के नीचे जाटों का खेला जा रहा नया खेल काशीपुर के नगर निगम एरिया में खोली गयी मिश्रित शराब की दुकान का सबसे बड़ा उदाहरण के रूप में सामने आया है जिसका विरोध जनता आने वाले दिनों में सडको पर उतर कर सकती है जो राज्य सरकार के खिलाफ भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। आबकारी आयुक्त आदेश को ठेंगा दिखा कर बड़ा बना जिला आबकारी अधिकारी

नियम कानून के अनुसार काशीपुर में खोली गयी मिश्रित शराब की दुकान को वहाँ से हटाए जाने के लिए आबकारी आयुक्त का आदेश होने के बाद भी इस दुकान पर जिलाअधिकारी से लेकर सचिवालय के एक साहब का इतना आशीर्वाद बना हुआ है जिसने ज़िले के आबकारी अधिकारी पर भी जातीय समीकरण का बोझ डाल दिया है जिसके कारण जिला आबकारी अधिकारी इस मामले पर अभी तक करवाही को अंजाम नहीं दे पाए है ये मामला जिला अधिकारी के कार्यालय में भी संज्ञान में होने के बाद भी करवाही न किया जाना कई तरह की चर्चाओं की तरफ इशारा करता नज़र आ रहा है।

राज्य के आबकारी मंत्री से लेकर सरकार के खिलाफ शराब कारोबारी लोगो को फायदा देने के लिए रची गयी इस कहानी का स्क्रिप्ट राइटर आखिर कार जातीय समीकरण का खेल अंजाम देकर सरकार की छवि को नुकसान पंहुचा रहा है इस मामले को लेकर जब पड़ताल की गयी तो पता चला की मिश्रित शराब की दुकान प्रतापपुर से हटा कर खोली गयी है जिसका लाखो रूपए का कारोबारी को फायदा हो रहा है।

यहाँ के शराब कारोबारी सरकार को प्रतापपुर की मिश्रित शराब की दुकान से अधिक अधिभार दे रहे है लेकिन ज़िले के आबकारी अधिकारी की मिलीभगत से मिश्रित शराब कारोबारी को फायदा पहुंचाया जा रहा है इस बारे में जब जिला आबकारी अधिकारी राजीव चौहान से भड़ास फॉर इंडिया से बात की गयी तो उन्होंने बताया की शराब नीति के अनुसार मिश्रित शराब की दुकान को हटाए जाने के लिए एक नोटिस भेजा जा चूका है दुकान को दूसरी जगह पर परिवर्तित किये जाने के लिए दुकान स्वामी द्वारा जगह तलाश की जा रही है उन्होंने बताया की शराब की दुकान प्रतापपुर मिश्रित शराब की दुकान है और शराब दुकान स्वामी द्वारा एक शराब की दुकान को खत्म किये जाने के लिए विभाग से कहा गया है जिसको लेकर सचिवालय में फाइल पर निर्णय होना बाकि है।

मिश्रित शराब की दुकान को हटाए जाने का आदेश आबकारी आयुक्त जुगल किशोर पंत ने ज़िले के आबकारी अधिकारी को दिया हुआ है लेकिन काफी समय होने के बाद भी इस मामले पर कुछ नहीं होना ज़िले के अधिकारी पर सवाल खड़ा कर रहा है की आखिर जिला आबकारी अधिकारी पर कौन सा इतना भार पड़ गया है जिसके वजन से वो शराब की दुकान को हटा नहीं पा रहे है इस बारे में जब जुगल किशोर पंत से भड़ास फॉर इंडिया ने बात की तो उन्होंने कहा की शराब की दुकान को हटाए जाने के लिए उनके द्वारा आदेश ज़िले को दिए गए है जिसका पालन करवाया जाना उनका काम है और शराब नीति के अनुसार नगर निगम एरिया में मिश्रित शराब की दुकान को खोला जाना नियम विरुद्ध है।

राज्य सरकार एक तरफ ईमानदारी से शराब नीति को लेकर काम किये जाने की बात कह रही है वही दूसरी तरफ आबकारी विभाग के अधिकारी सरकार की शराब नीति के खिलाफ जा कर शराब कारोबारी को फायदा पंहुचा रहे है ऐसे में सवाल उठ रहा है की या तो सरकार ईमानदारी से काम कर रही या फिर ज़िले के आबकारी अधिकारी अपनी ईमानदारी का इनाम विभाग को दे रहे है इस पुरे मामले पर ज़िले के आबकारी अधिकारी की भूमिका कही से भी सही नहीं कही जा सकती विभाग को ऐसे अधिकारी को हटा देना जरुरी होगा जो अपने विभाग का आदेश ज़िले में अमल न करवा सके।

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