आपदा जोखिम आंकलन बैठक सम्पन्न।

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आपदा जोखिम आंकलन बैठक सम्पन्न।

बागेष्वर जिलाधिकारी मंगेष घिल्डियाल की अध्यक्षता में देहरादून से आई आपदा प्रबन्धन न्यूनीकरण की टीम ने विभागीय अधिकारियों के साथ आपदा जोखिम आंकलन के सम्बन्ध में एक बैठक आहूत कर उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम आंकलन के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी देते हुए प्रथम,द्वितीय एवं तृतीय ग्रुप में षामिल विभागीय अधिकारियों के साथ आपदा जोखिम आंकलन के सम्बन्ध में विचार विमर्ष किया। प्रोजक्टर के माध्यम से भी आपदा जोखिम आंकलन की जानकारी दी गई। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में ग्रुप लीडर टौम बुरकिट ने तथा जोखिम प्रबन्धन के परामर्षक पी0डी0 माथुर ने उत्तराखण्ड का आपदा जोखिम आंकलन के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड एक मध्य हिमालयी राज्य है जिसकी भूगर्भीय संरचना,अत्यधिक बर्शा एवं अन्य कारक इस राज्य को प्राकृतिक घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनषील बनाते हैं जिसमें भूकम्प,भूस्खलन,त्वरित बाढ़,बादल फटना आदि घटनाऐं प्रमुख है। उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्शो में इन प्राकृतिक घटनाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है जिसके कारण उत्तराखण्ड राज्य में जानमाल एवं मूलभूत संरचनाओं को काफी क्षति हुई है। इन प्राकृतिक घटनाओं से होने वाली क्षति के मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि व अनियोजित विकास प्रमुख है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का समग्र आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय विकास तभी सम्भव है जब हम इन प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को भाॅपते हुए समाज की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करें। कहा कि इसी के दृश्टिगत उत्तराखण्ड सरकार ने विष्व बैंक के सहयोग से उत्तराखण्ड राज्य पुर्नवास परियोजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण उत्तराखण्ड राज्य का आपदा जोखिम आंकलन विशय विषेशज्ञों द्वारा निश्पादित किये जाने हेतु निर्णय लिया है ताकि राज्य में अवस्थित महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं एवं समाज के प्रति प्राकृतिक खतरों को भाॅंपने हुए एक सुरक्षित भविश्य की नींव रखी जा सके। उन्होेने बताया कि इस कार्य के अन्तर्गत राज्य के समस्त जनपदों में एक सर्वे कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है जिसमें समस्त सरकारी,गैर सरकारी,रिहायसी मकान,व्यापारिक प्रतिश्ठान,स्कूल,कालेज एवं अन्य भवनों का संरचनात्मक सर्वे किया जायेगा जिसके आधार पर एक विस्तृत जोखिम आंकलन किया जायेगा जिसका उपयोग विकास योजनाओं में करते हुए एक आपदाप्रतिरोधक समाज की स्थापना की जायेगी। श्री माथुर ने बताया कि इस कार्य हेतु राज्य सरकार ने सिंगापुर की संस्था डीएचआई को चयनित किया है जो इस कार्य को अपने तकनीकी सहयोगी ईआरएन मैक्सीको ,एषियन इन्स्टीट्यूट आफ टैक्नालाजी एवं अर्थ आब्जरबेटरी आफ सिंगापुर के साथ मिलकर निश्पादित करेंगे। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों से इस कार्य में अह्म भूमिका निभाने की अपील करते हुए उनके पदवि/नजजंदीक.कतंण्पद वैवसाइड पर अपनी राय व सुझाव भेजने को कहा। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को अपने विभाग से सम्बन्धित डाटा का सही आंकलन कर आपदा प्रबन्धन को उपलब्ध कराने के निर्देष दिये। बैठक में अपरजिलाधिकारी एस.एस. जंगपांगी,प्रभागीय वनाधिकारी एम.बी.सिंह,उपजिलाधिकरी गरूड रविन्द्र सिंह बिश्ट,कपकोट एन.एस.नगन्याल,मुख्य चिकित्साधिकारी संजय षाह,जिला पंचायतराज अधिकारी पूनम पाठक,अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत राजेष कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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