सहकारिता एक जनसहभागिता का आंदोलन मुख्यमंत्री

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देहरादून शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने परेड़ ग्राउन्ड में 20 से 26 नवम्बर तक चलने वाली अंतर्राज्यीय सहकारी प्रदर्शनी 2015 का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि सहकारिता एक जनसहभागिता का आंदोलन है। सहकार की भावना हो तो वो सब किया जा सकता है जिसे अकेले नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सहकारिता विभाग को रेशा बोर्ड के माध्यम से कंडाली, भीमल व रामबांस के रेशों को खरीदने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। इसकी खरीद में 25 प्रतिशत सब्सिडी देने पर राज्य सरकार विचार कर सकती है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि बहुत से राज्यों में सहकारिता के माध्यम से गांवों की तस्वीर बदलने का काम किया गया है। हम भी अपने राज्य में सहकारी खेती को अपना सकते हैं। छोटे-बड़े स्थानीय उद्यमों को अपना सकते हैं। सहकारी विभाग के दृष्टिकोण में परिवर्तन आया है। ऋण देने वाली संस्था की भूमिका से आगे बढ़कर माॅटीवेटर की भूमिका निभाई जा रही है। सहकारी विभाग को तेजी से काम करने की जरूरत है। लोग भी अपने जीवन के तरीकों में परिवर्तन के लिए मानसिक तौर पर तैयार हैं। हमें पलायन को रोकना है तो सहकारिता को अपना कर गांवों की तकदीर बदलनी होगी। हमें अपने गांवों केा प्रोडक्शन हाउस बनाना होगा। हमारे यहां कंडाली, रामबांस व भीमल के स्थानीय रूप से उत्पादित पौधों से रेशे तैयार किए जा सकते हैं। हमारे यहां ग्रामीण पारम्परिक व्यंजनों की समृद्ध विरासत है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने स्मारिका का भी विमोचन किया। उन्होंने प्रदर्शन में विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने की। इस मौके पर राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष संजीव आर्य, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार, सचिव सहकारिता विजय ढौंडि़याल सहित अन्य गणमान्य मौजूद थे।

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