शहीद स्मारक जमीन पर समाज कल्याण अधिकारी का कब्ज़ा

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शहीद स्मारक जमीन पर समाज कल्याण अधिकारी का कब्ज़ा:1999 KARGIL VAR KALISH KUMAR BHATT
देहरादून एक दशक का लम्बा इंतज़ार उम्मीद की किरण शहीद हुए बेटे के नाम पर जमीन पर कब्ज़ा किये जाने का दर्द प्रधानमंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक पहुचाये जाने के बाद भी कोई कारवाही नहीं होने पर शहीद परिजनों का दर्ज़ एक बार फिर सामने आया है इतना ही नहीं इस मामले का खुलासा पूर्व में भी किया जा चूका है लेकिन कारवाही के नाम पर कुछ नहीं हुआ आखिर एक शहीद के परिजनों के साथ जब इस तरह का अपमान जनक काम किया जा रहा है तो आखिर समाज में एक गरीब को इंसाफ के लिए कितना कठिन डगर भरा सफर तय करना होता होगा ये बताने के लिए काफी हैशहीद स्मारक जमीन पर समाज कल्याण अधिकारी का कब्ज़ा

देहरादून शहीद स्मारक के लिए आवंटित ग्राम समाज की भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। कारगिल शहीद के परिजनों के अनुसार भूमि पर कब्जे में समाज कल्याण विभाग का एक अधिकारी भी शामिल है। जिसने ऋषिकेश तहसील के राजस्व कार्मियों से मिलीभगत कर भूमि अपने नाम दर्ज करा ली है। इस भूमि पर छात्रवास का निर्माण कर किराए पर दे दिया गया है। शहीद के परिजनों ने इसकी शिकायत सीएम से लेकर पीएम और रक्षा मंत्री तक की है, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।

वर्ष 1999 में हुए करगिल युद्ध में ऋषिकेश तहसील के डांडी-बड़कोट निवासी राइफलमैन कैलाश कुमार भट्ट शहीद हुए थे। शहीद के नाम पर बनने वाले स्मारक व प्रतिमा की स्थापना के लिए वहां खसरा संख्या 1206 ग में 0.0770 हेक्टेयर भूमि आवंटित हुई थी। ग्राम सभा की बैठक में वर्ष 2002 में इसका प्रस्ताव भी पारित किया गया था, लेकिन सैनिक की शहादत के डेढ़ दशक बाद भी न ही शहीद स्मारक बनाने के लिए उपरोक्त भूमि मिल सकी और न ही शहीद की प्रतिमा स्थापित ही हुई।

शहीद सैनिक के पिता राम किशोर भट्ट और भाई राधेश्याम भट्ट ने सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से कहा कि उक्त भूमि पर किसी और ने कब्जा कर निर्माण कार्य भी कर लिया है। छानबीन पर पता चला कि राजस्व रिकार्ड में यह भूमि समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी के नाम पर दर्ज है। उनका कहना है कि यह शहीद का अपमान है। सरकारी संपत्ति को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।उत्तराखंड से शहीद हुए परिजनों के साथ इस तरह का कारनामा ये बताने के लिए भी काफी है किस तरह राजनेता वोट बैंक के लिए चुनावी समर में जनता के पास जाकर वादे करते है ये वही परिवार है जब शहीद के घर पर राजनेता से लेकर अधिकारी पहुंचे थे लेकिन अब इस परिवार को भुला दिया गया लगता है

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