सरकारी सिस्टम क्या मरने के बाद देगा सौ साल की कृष्णा को वृद्धा पेंशन

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सरकारी सिस्टम क्या मरने के बाद देगा सौ साल की कृष्णा को वृद्धा पेंशन 100 Yeras Vido Woman UTTARAKHAND सरकारी सिस्टम क्या मरने के बाद देगा सौ साल की कृष्णा को वृद्धा पेंशन चंद्र प्रकाश बुडाकोटी प्रकाश
उत्तराखंड बने 17 साल हो गए भाजपा की सरकार से लेकर कांग्रेस की सरकारों ने सत्ता की कुर्सी पर राज किया लेकिन किसी की भी नज़र इन १०० साल की उम्र पर पहुंच चुकी इन विधवा महिलाओं पर नहीं पहुंची आखिर समाज में जनता के साथ किये गए वो तमाम वादे क्या पुरे किये होंगे जिसमे सरकारों के राजनैतिक नेता वादों की बारिश लगा कर उनको पूरा किया जाने का सपना दिखा कर गायब हो जाते है रुद्रप्रयाग जनपद की विधवा महिलाओं को वर्तमान सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत से लेकर कांग्रेस सरकार में विधायक तक को इसकी जानकारी नहीं की आखिर उम्र की इस दहलीज पर पहुंच चुकी महिला को पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया।

जनता के वादों को पूरा किये जाने का सपना दिखा कर कई बार उनका भरोसा तोडा गया इसके बाद भी विधवा महिलाये ग्राम प्रधान से लेकर विधायक तक को अपना वोट देकर अपना सामाजिक काम करती रही लेकिन अधिकारी से लेकर उनकी आखो में शर्म नज़र नहीं आयी जिनके हाथो में जनता का काम किया जाना सरकारी सिस्टम कहा जाता है।
देहरादून चार रोज पहले केदारनाथ के बिधायक मनोज रावत की एक पोस्ट सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई। सौ साल की कृष्णा देवी जो पंद्रह बर्ष की उम्र में विधवा हो गई ,दो बार आवेदन किया लेकिन विधवा पेंशन नहीं मिल पाई यह अकेली नहीं इसी गावँ की चार वृद्ध महिलाये और भी है और राज्य के अनेक गावो में भी यही सब कुछ सामने आ रहा है।जिनके साथ भी सिस्टम का मजाक यूँ ही रहा। सिस्टम और ब्यवस्था की हकीकत कि पोल खोल कर रख देने वाली उस तस्वीर ने हमारे सिस्टम के नकारे पन को सामने लाकर रख दिया है।

सौ साल की इन महिलाओ के वृद्धा पेंशन मामले ने साबित कर दिया की प्रसासनिक अमला और नेता पहाड़ी जनमानस के प्रति कितना सजग है। राजनैतिक दलों के दावे और वादे की असलियत कितनी खोखली होती है। वह रुद्रप्रयाग के इस दशज्यूला कांडई गांव के इन बुजुर्गो की हकीकत को देख कर समझा जा सकता है।

गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग जनपद के दशज्यूला काण्डई का एक गांव क्यूड़ी, जहाँ की कृष्णा देवी,जिसकी उम्र 100 साल से ऊँपर है, पति नरेंद्र सिंह, जम्मू- कश्मीर में आजादी से पहले रेलवे में काम करते थे। जो वही मर गए। जब पति मरे, कृष्णा देवी की उम्र 15-16 साल थी और जीवन काटने के लिए कुछ महीने का एक बेटा था। तब पति की पेंशन भी नही लगी। कही सरकारी विधवा पेंशन योजनाएं आयी, कही सरकारें बनी, कही जनप्रतिनिधि चुने गए पर 100 साल की ओर बड़ रही कृष्णा देवी की आज तक पेंशन नही लग पाई। कुछ साल पहले बेटे भी मर गए। अब परिवार में दो विधवाएं हैं। 3 पोतियों की शादी हो गयी।

बगल पर शंकरी देवी के पति नायक धीर सिंह भी 1971 के युद्ध में शहीद हो गए उनके बेटे भी फौज को नौकरी के लिए चिट्ठी लिखते हुए बहुत कम उम्र में मर गए। शंकरी देवी के पति के शहीद होने के 4 दिन बाद उनका ये अभागा बेटा मुन्ना पैदा हुआ था। फौज ने भी शहीद सैनिक के परिवार के लिए कुछ नही किया।
एक परिसर में रहने वाले 2 परिवारों में दो- दो विधवाएं।
अब नई आफत, इस बरसात में इन 4 विधवाओं का मकान टूट रहा है। उसी टूटे मकान में ये 4 विधवाएं एक ओर आपदा के इंतजार कर रही हैं।
मुझे इन 4 विधवाओं के समूह से मिल कर ओर उनकी हालात देखकर स्वयं को जनप्रतिनिधि बताते हुए शर्म आ रही है।मनोज रावत बिधायक केदारनाथ का कहना है की अगर इसी तरह समाज के हर वर्ग का मजाक उड़ता रहा था तो सरकारों और अधिकारी वर्ग क्या कर रहे है इसका आकलन किया जाना जरुरी है

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